Sunita williams Biography in Hindi। सुनीता विलियम्स की जीवनी

Sunita williams Biography in Hindi। सुनीता विलियम्स की जीवनी:भारतीय मुलकी सुनीता विलियम्स गुजरात ,भारत और पुरे विश्वकी की बेटी थी। विश्व की पूरी महिलाओं के लिए गर्व की बात है। अब हम कह सकते है की यदि नारी को सर्वोच्च स्थान पर बैठाना है तो सुनीता की तरह साहसी और महत्वाकांक्षी बनना होगा। तो आज भारतकी बेटी Sunita williams Biography in Hindi। सुनीता विलियम्स की जीवनी की बारे में जानते है। 


नाम: सुनीता माइकल जे.विलियम 

जन्म: 19 सितंबर 1965 ,यूक्लिड ,ओहियो राज्य 

पिता: डॉ. दीपक एन. पांड्या 

माता: बानी जालोकर पांड्या 

विवाह: माइकल जे. विलियम 






Sunita williams Biography in Hindi। सुनीता विलियम्स की जीवनी
Sunita williams Biography in Hindi। सुनीता विलियम्स की जीवनी

    सुनीता विलियम्स का प्रारंभिक  जीवन 


    सुनीता  का जन्म 19 दिसंबर, 1965 को ओहयो ,अमेरिका में हुआ था। मुक्त वातावरण में  पली  सुनीता में साहसिक वृत्तियाँ उभर सकी।   सुनीता बचपन से ही दौड़, स्विमिंग,बाइकिंग, स्नोबोर्डिंग, धनुर्विद्या जैसे साहसभरे खेलों में भाग लेती थी। वह मेहनती थी। घर वाले उसे प्यार से सुनी कहते थे। 6 साल की सुनी ने अमेरिकी यात्री नील आर्म स्ट्रांग को चांद की धरती पर उतरते देखा था तब से मन में निश्चय कर लिया था कि मुझे कुछ ऐसा कर दिखाना  है। बचपन का संकल्प उसने साकार किया। 



    सुनीता का भारतीय होना हमारे लिए गर्व की बात है। उनके नाम के पीछे विलियम्स लगता  है तो फिर भारतीय  या गुजराती कैसे, यह हमारे मन में प्रश्न उठता  है। सुनीता भारतीय नागरिक नहीं है, परंतु उनका मूल गुजरात से जुड़ा है। उनके पिता दीपक भाई पंड्या का जन्म गुजरात के मेहसाणा जिले के झूलासण  गांव में हुआ था। उन्होंने आधी जिंदगी गुजरात में बिताई अहमदाबाद में माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा प्राप्त की। डॉक्टरी सेवा देकर 1960 में सदा के लिए अमेरिका गए। वे मैसाचुसेट्स के कालमाउथ में प्रसिद्ध न्यूरो सर्जन थे। उन्होंने उसबाईन  बोनी नामक युगोस्लावियन युवती से शादी की। पिता दीपक पड्या और माता उसबाइन के जय ,दीना और सुनीता - और तीनो  संतानो में सुनीता सबसे छोटी है।

                           Sunita williams Family   Source-Google




    सुनीता विलियम्स की शिक्षा 


    सुनीता विलियम्स की हाईस्कूल की शिक्षा मैसाचुसेट्स से  हुई, यूनाइटेड स्टेट नेवल अकादमी मेरीलैंड से भौतिक विज्ञान से स्नातक किया।
    इंजीनियरिंग मैनेजमेंट फ्लोरिडा इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी 1995 में , बाद में अनुस्नातक किया। इसके पहले 1987 में नेवल अकादमी से  व्यवसायिक अनुभव के लिए जुड़ी जहाँ साहस और श्रम की प्रवृत्तियों का महत्व था। उसके बाद नेवी में एविएशन ट्रेनिंग, अमेरिका में कमीशन अधिकारी बेसिक डिवाइग  ऑफिसर का पद मिला। हेलीकॉप्टर प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के बाद ऑफिसर इंचार्ज बन गई। सुनीता को यूनाइटेड  स्टेटस नेवेल टेस्ट पायलट कोर्स के लिए चयनित किया गया, पायलट बनने की सिद्धि को प्रथम कदम माना। अंतरिक्ष पर जाने की तीव्र इच्छा थी। इसलिए हीमत नहीं हारी  और नासा जाने में सफल हुई, तब से आज तक सुनीता नासा में कार्यरत है। 1998 में अंतरिक्ष यात्री कार्यक्रम में द्रितीय प्रयास में चयन हुआ। दुनिया में हजारों वैज्ञानिक और पायलट है पर अतरिक्सयात्री केवंल सी है । 


    सुनीता विलियम्स की शादी 

    माइकल विलियम Source-Google


    सुनीता ने खास मित्र और सहाध्यायी माइकल विलियम से शादी की और सुनीता पंड्या से सुनीता विलियम्स बन गई। माइकल विलियम्स ने सुनीता की सिद्धि में साथ दिया ।


    सुनीता विलियम्सका प्रेरणास्रोत 


    सुनीता को अंतरिक्ष परी बनाने में कल्पना चावला ने ही  प्रेरणा स्रोत का काम किया है। पिछले 8 वर्षों में अंतरिक्ष यात्रा पर जाने वाली भारतीय मूल की दूसरी महिला की सकुशल वापसी से लोगों ने राहत की सांस ली। अपनी वापसी के समय उन्होंने कहा था कि नासा के अभियान में कल्पना के साथ काम करना बेहद सुखद अनुभव था ।हम दोनों की रुचि काफी अलग थी लेकिन भारतीय होना हमें  एक सूत्र में पिरोता था। दोनों को भारतीय संगीत से बेहद लगाव था। कल्पना से मुझे काफी कुछ सीखने को मिला।


    सुनीता विलियम्स की नासाकी सफर 


    सुनीता विलियम्स की नासाकी सफर 



    जून ,1998 में सुनीता को नासा के लिए चयनित किया गया। अगस्त, 1998 में उन्होंने नासा में प्रशिक्षण प्रारंभ कर दिया। कड़े प्रशिक्षण के बाद सुनीता खुद अंतरिक्ष यात्रा के लिए तैयार हो गई। सुनीता बताती है कि अंतरिक्ष स्पेश स्टेशन में जिंदगी आसान नहीं है। खाने से लेकर नहाने तक यहां सब कुछ कठिन है। लौटने में मुश्किल होती है। आरंभ में चलने फिरने में दिक्कत होती है। हड्डियां कमजोर हो जाती है। दिमाग तैयार होने में समय लगता है। सुनीता ने खुद को अंतरिक्ष प्रशिक्षण लेकर तैयार किया। वैज्ञानिक तकनीक भरे  व्याख्यान ,रूस में रहकर अंतरिक्ष कार्यक्रम तथा उनके यान  के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने गोताखोरी में अनुभव होनेवाले भारहीनता से स्पेशवॉक प्रशिक्षण  में सहायता प्रदान की। अंतरिक्षयात्रा के संदर्भ में बहुत सी वैज्ञानिक जानकारियां और मुश्किलों के बारे में जाना। वे अंतरिक्ष के संभवित खतरों से खेलने के लिए तैयार हो चुकी थी ।सुनीता पूरी तैयारी के लिए 9 दिन पानी के अंदर भी रही। प्रषिक्षण ख़त्म होने में करीब 8 साल लगे। 



    डिस्कवरी अभियान फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से फ्लाइट इंजीनियर के तौर पर डिस्कवरी मिशन में शामिल होने के बाद 10 दिसंबर, 2007 अटलांटिस अंतरिक्ष यान से सुनीता स्पेश  स्टेशन पहुंची। 17 दिसंबर को अंतरिक्ष में चहलकदमी की। पृथ्वी  से 360 किलोमीटर की दूरी पर कक्षा में स्थित अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की गति प्रति घंटे 27744 किलोमीटर थी। यहां अड्डा प्रतिदिन पृथ्वी के अंदर 15.7 चक्कर काटता था। अर्थात सुनीता ने पृथ्वी के 2967 चक्कर अपने अंतरिक्ष प्रवास में लगाए। इस अभियान ने सुनीता ने 29 घंटे 17 मिनट तक स्पेसवॉक करके अंतरिक्ष में रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले अप्रैल माह में 4 घंटे 24 मिनट में मैराथन जीतने वाली पहली अंतरिक्ष यात्री बन चुकी थी। अंतरिक्ष के बॉस्टन मैराथन में साढे चार  घंटे में 42  किलोमीटर का सफर काटने वाली प्रथम अंतरिक्ष यात्री हुई। सुनीता ने अंतरिक्ष में 188 दिन और 4 घंटे के शैनोन ल्युसिक का रिकॉर्ड तोड़ा। 






    सुनीता  विलियम्स का 6 महीने तक रहने का अनुभव है कि वहां व्यायम करना  बहुत आवश्यक है। ताकि मासपेशिया और हड्डियों की शक्ति बनाए रखी जा सके। शरीर को लचीला बनाए रखा जाये।  जैसा की साइकिल चलाना , दौड़ना, हवा में तैरना आदि अंतरिक्ष यात्रा में सोना मुश्किल, रोज डिब्बाबंद भोजन, भारहीनता,शरीर के लचीलेपन  तीव्र गति से खत्म होना, मांसपेशियों और हड्डियों को तेज क्षति जैसी  समस्या थी।



    सुनीता ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र में 6 महीने प्रवास के दौरान कई महत्वपूर्ण कार्य किए, जैसे ह्यूमन लाइफ साइंस, फिजिकल साइंस, पृथ्वी  का निरीक्षण,शिक्षा और टेक्नोलॉजी डेमोंसट्रेशन जैसे विषयों पर काम किया। इसके अलावा सुनीता ने इस दौरान जमा किए गए ब्लड सैंपल, न्यूट्रीशन से संबंधित अनुसंधान कर रहे वैज्ञानिकों तक पहुंचाएं।



    सुनीता ने कहा, "यहां पर सबसे बड़ी बात मुझे यह लगती है कि हमारी पृथ्वी कितनी शानदार है। दुनिया को अलग नजरिए से देखने का मौका और या अंतर्दृष्टि मिलती है कि अपने ग्रह को कैसे आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाए अंतरिक्ष मिलजुल कर काम करने की बढ़िया जगह है और यहां आकर ऐसा लगता है कि हम पृथ्वी पर क्यों विवादों में उलझे रहते हैं"। 


    नई दिल्ली के अमेरिकी सेंटर में अंतरिक्ष यान जब भारत पर से गुजरात तक वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान सवालों के जवाब देती। सुनीता ने कहा कि यहां से विश्व सेवाओं में बटा नजर नहीं आता। यहां से सिर्फ दिखता है। हमारा सुंदर ग्रह सुंदर ग्रामीण इलाके सुंदर पहाड़ और आसमानी रंग की सुंदर महासागर हरे मैदान और उनके रंगों में जमीन दिखाई दे रही थी। यह दृश्य बहुत मनोहर था।


    सुनीता विलियम्स अंतरिक्षसे धरती पर रवाना 


    19 जून, 2007 को स्पेस शटल अटलांटिस सुनीता समेत सात अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर धरती की ओर रवाना हुआ। पूरा विश्व सुनीता की सकुशल वापसी के लिए प्रार्थना कर रहा था। 194  दिन 18 घंटे  और 58 मिनट अंतरिक्ष में बिताकर रिकॉर्ड बनाकर सुनीता की वापसी 22 जून 2007 को हुई।  सुनीता के  आश्चर्यजनक कार्य से भारतीयों और गुजरातियों का सर ऊंचा हुआ। हम कह सकते हैं कि यदि नारी को सर्वोच्च स्थान पर बिठाना है तो सुनीता की तरह साहसी और महत्वाकांक्षी बनना होगा।


    सुनीता विलियम्स को पुरस्कार और सम्मान 


    सुनीता  विलियम्स, नौसेना पोत चालक, हेलीकॉप्टर, पायलट, पेशेवर, नौसैनिक, पशु प्रेमी,  और अंतरिक्ष यात्री एवं विश्व कीर्तिमान धारक है। अपने कार्य क्षेत्र में उपलब्धियों के लिए उन्हें कई सम्मान मिले है। 
    • नेवी कमेंडेशन मेडल
    •  नेवी एंड मैरीन कॉर्प  एचीवमेन्ट  मेडल
    •  ह्यूमैनिटेरियन सर्विस मेडल
    •  मेडल फॉर  मैरिट  इन स्पेस एक्सप्लोरेशन
    •  सन 2008 में भारत सरकार ने पद्मभूषण से सम्मानित किया
    •  सन 2003 में गुजरात विश्वविद्यालय ने डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की
    •  सन 2003 में स्लोवेनिया  द्वारा गोल्डन ऑर्डर फॉर मैरिट्स  प्रदान किया गया

    निष्कर्ष 

    मुझे पूरी उम्मीद है की मेरी पोस्ट Sunita williams Biography in Hindi। सुनीता विलियम्स की जीवनी आपको जरूर पसद आएगी। अगर आपको इस पोस्ट से कुछ सीखने को मिलता है तो मुझे अच्छा लगेगा। आपको इस पोस्ट के बारेमे कुछ कहना चाहते है तो मुझे जरूर कमेंट कीजिए। और दुसरो को सोशियल मीडिया जैसे फेसबुक,ट्विटर ,व्हाट्सप पर शेर कीजिए।  जय हिन्द जय भारत. 


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